विश्राम अवकाश
विश्राम अवकाश काम के बीच का वह अनिवार्य ब्रेक है जो कर्मचारी को खाने, सुस्ताने और दोबारा तरोताज़ा होने के लिए मिलता है। भारतीय कानून लगातार काम के घंटों की सीमा तय करता है — ब्रेक देना नियोक्ता की मर्ज़ी नहीं, ज़िम्मेदारी है।
भारत में ब्रेक के नियम
कारखाना अधिनियम 1948 के अनुसार कोई भी कर्मचारी लगातार पाँच घंटे से अधिक काम नहीं कर सकता — उसके बाद कम से कम आधे घंटे का विश्राम ज़रूरी है। दिन भर के काम और ब्रेक मिलाकर 'स्प्रेड-ओवर' की भी सीमा है, ताकि कार्य-दिवस बेहिसाब न खिंचे।
- दुकानों, रेस्तरां और दफ़्तरों पर राज्य के दुकान एवं स्थापना अधिनियम के मिलते-जुलते प्रावधान लागू होते हैं — सीमाएँ राज्य-दर-राज्य थोड़ी अलग हैं।
- सप्ताह में एक दिन का अवकाश (साप्ताहिक छुट्टी) लगभग हर कानून में अनिवार्य है।
- छूटे साप्ताहिक अवकाश के बदले प्रतिपूरक अवकाश देने का नियम भी है।
रोस्टर बनाते समय
शिफ़्ट डिज़ाइन करते समय ब्रेक को शिफ़्ट के भीतर ही नियोजित करें — व्यस्त घंटों के ठीक पहले या बाद। पाँच घंटे की सीमा का ध्यान रखने से नियम भी पूरा होता है और दोपहर की थकान से होने वाली ग़लतियाँ भी घटती हैं।
कारखाना अधिनियम 1948 (धारा 55–56: विश्राम अंतराल व स्प्रेड-ओवर) तथा राज्य के दुकान एवं स्थापना अधिनियम — लगातार काम की सीमा, ब्रेक और साप्ताहिक अवकाश के प्रावधान।
Tommy में शिफ़्ट के साथ ब्रेक भी रोस्टर पर तय किए जा सकते हैं, जिससे हर कर्मचारी को पता रहता है कि उसका विश्राम कब है और रिकॉर्ड में भी वह दर्ज रहता है।