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ठेका श्रमिक अधिनियम 1970

ठेका श्रमिक (विनियमन एवं उत्सादन) अधिनियम 1970 उन श्रमिकों की सुरक्षा के लिए है जो किसी ठेकेदार के ज़रिए — सीधे नहीं — किसी प्रतिष्ठान में काम पर लगाए जाते हैं: सफ़ाई, सुरक्षा, हाउसकीपिंग, किचन-सपोर्ट जैसी भूमिकाओं में यह बहुत आम है।

मुख्य प्रावधान

  • अधिनियम निर्धारित संख्या से अधिक ठेका श्रमिक लगाने वाले प्रतिष्ठानों और ठेकेदारों पर लागू होता है — सीमा राज्य संशोधनों से अलग-अलग है।
  • प्रधान नियोक्ता (काम कराने वाला प्रतिष्ठान) को पंजीकरण कराना होता है और ठेकेदार को लाइसेंस लेना होता है।
  • ठेका श्रमिकों के लिए कैंटीन, विश्राम-कक्ष, पीने का पानी और प्राथमिक उपचार जैसी कल्याण-सुविधाएँ सुनिश्चित करनी होती हैं — ठेकेदार चूके तो ज़िम्मेदारी प्रधान नियोक्ता की।
  • वेतन का भुगतान ठेकेदार करता है, पर वह समय से और पूरा हो — यह देखना प्रधान नियोक्ता का दायित्व है; चूक पर भुगतान की ज़िम्मेदारी उसी पर आती है।
  • सरकार कुछ कामों में ठेका श्रम पर रोक (उत्सादन) भी लगा सकती है।

व्यवहार में

ठेकेदार चुनते समय उसका लाइसेंस, पीएफ-ईएसआई पंजीकरण और वेतन-रिकॉर्ड जाँचें — काग़ज़ ठेकेदार का हो या आपका, निरीक्षण में जवाबदेही प्रधान नियोक्ता से ही शुरू होती है। हाज़िरी का समानांतर रिकॉर्ड रखना समझदारी है।

ठेका श्रमिक (विनियमन एवं उत्सादन) अधिनियम 1970 — पंजीकरण/लाइसेंस राज्य व केंद्र के श्रम विभागों से; लागू होने की सीमा राज्य संशोधनों से अलग; OSH संहिता 2020 इसे समाहित करेगी (क्रियान्वयन शेष)।

Tommy में ठेका स्टाफ़ की शिफ़्टें और हाज़िरी भी उसी रोस्टर में दर्ज की जा सकती हैं, जिससे प्रधान नियोक्ता के पास घंटों का अपना स्वतंत्र रिकॉर्ड बना रहता है।

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