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पीएफ और ईएसआई अंशदान

भारत में औपचारिक रोज़गार के साथ दो मुख्य सामाजिक-सुरक्षा अंशदान जुड़े हैं — ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि), जो सेवानिवृत्ति की बचत है, और ईएसआई (कर्मचारी राज्य बीमा), जो इलाज और बीमारी-मातृत्व जैसे नक़द लाभ देता है। दोनों में नियोक्ता और कर्मचारी, दोनों का अंशदान होता है।

भारत में ये अंशदान कैसे चलते हैं

  • ईपीएफ: ईपीएफ अधिनियम 1952 के तहत, निर्धारित संख्या से अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों पर लागू। अंशदान मूल वेतन व महंगाई भत्ते पर लगता है; दरें और वेतन-सीमा केंद्र सरकार/EPFO अधिसूचित करती है।
  • ईएसआई: ईएसआई अधिनियम 1948 के तहत, अधिसूचित क्षेत्रों के प्रतिष्ठानों में, अधिसूचित वेतन-सीमा तक के कर्मचारियों पर लागू। दरें ESIC/केंद्र सरकार तय करती है।
  • दोनों में कटौती और जमा की ज़िम्मेदारी नियोक्ता की है — कर्मचारी का हिस्सा वेतन से काटकर अपने हिस्से के साथ हर महीने तय तारीख़ तक जमा करना होता है।

देर से जमा करने पर ब्याज और हर्जाना लगता है, इसलिए पेरोल कैलेंडर में इन तारीख़ों को पक्का रखें।

शिफ़्ट टीमों के लिए मायने

रेस्तरां-रिटेल में पार्ट-टाइम और बदलते स्टाफ़ के कारण पात्रता पर नज़र रखना ज़रूरी है — ईएसआई की वेतन-सीमा और ईपीएफ की सदस्यता नियुक्ति के समय ही जाँच लें, और हर कर्मचारी का UAN व ईएसआई नंबर रिकॉर्ड में रखें।

कर्मचारी भविष्य निधि एवं प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम 1952 (EPFO) तथा कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम 1948 (ESIC) — दरें, वेतन-सीमाएँ और प्रक्रिया केंद्र सरकार व ये प्राधिकरण अधिसूचित करते हैं।

Tommy के पेरोल-रेडी टाइमशीट से हर कर्मचारी के महीने भर के घंटे और कमाई का आधार साफ़ मिलता है, जिससे पीएफ-ईएसआई की गणना के लिए आँकड़े जुटाना आसान रहता है।

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