दुकान एवं स्थापना अधिनियम
दुकान एवं स्थापना अधिनियम वह कानून है जो कारखानों से बाहर की दुनिया — दुकानों, रेस्तरां, होटलों, दफ़्तरों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों — में काम की शर्तें तय करता है। ख़ास बात यह है कि यह केंद्रीय नहीं, राज्य-स्तरीय कानून है: महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली — हर राज्य का अपना अधिनियम और अपने नियम हैं।
यह कानून क्या-क्या तय करता है
- प्रतिष्ठान का पंजीकरण — कारोबार शुरू करने पर तय समय में पंजीकरण कराना होता है।
- काम के घंटे — दैनिक व साप्ताहिक सीमा, ओवरटाइम की दर और खुलने-बंद होने का समय।
- छुट्टियाँ — साप्ताहिक अवकाश, अर्जित/आकस्मिक/बीमारी अवकाश और त्योहार की छुट्टियाँ।
- रिकॉर्ड — हाज़िरी, वेतन और छुट्टी के रजिस्टर।
- महिलाओं के काम के घंटे और रात्रि पाली की शर्तें, बाल-श्रम पर रोक।
चूँकि हर राज्य का कानून अलग है, एक से ज़्यादा राज्यों में आउटलेट चलाने वाले कारोबार को हर राज्य की शर्तें अलग-अलग देखनी पड़ती हैं — छुट्टियों की संख्या से लेकर ओवरटाइम की सीमा तक सब बदल सकता है।
रेस्तरां और रिटेल के लिए मायने
शिफ़्ट-आधारित कारोबारों पर रोज़ लागू होने वाला कानून यही है — कारखाना अधिनियम नहीं। रोस्टर, ब्रेक और छुट्टियाँ इसी के दायरे में बनती हैं, इसलिए अपने राज्य का अधिनियम और उसकी ताज़ा अधिसूचनाएँ पहचानना पहला क़दम है।
संबंधित राज्य का दुकान एवं स्थापना अधिनियम (जैसे महाराष्ट्र 2017, दिल्ली 1954, कर्नाटक 1961) — प्रशासन राज्य श्रम विभाग के पास; प्रावधान राज्य-दर-राज्य अलग हैं।
Tommy से बने रोस्टर और हाज़िरी रिकॉर्ड वही ब्योरा देते हैं जो इस अधिनियम के रजिस्टरों में चाहिए — घंटे, ब्रेक और साप्ताहिक छुट्टी सब एक जगह दर्ज रहते हैं।