प्रतिपूरक अवकाश
प्रतिपूरक अवकाश (कॉम्प-ऑफ़) वह सवेतन छुट्टी है जो कर्मचारी को तब मिलती है जब उससे उसके अवकाश के दिन — साप्ताहिक छुट्टी या त्योहार — काम कराया गया हो। विचार सीधा है: जो आराम छूटा, वह बाद में लौटाया जाए।
भारत में कानून क्या कहता है
- कारखाना अधिनियम 1948 (धारा 53): साप्ताहिक छुट्टी से वंचित कर्मचारी को उतने ही प्रतिपूरक अवकाश देने होते हैं, और वे निर्धारित अवधि के भीतर देने ज़रूरी हैं।
- दुकान एवं स्थापना अधिनियम: अधिकांश राज्यों में साप्ताहिक छुट्टी या त्योहार के दिन काम कराने पर बदले की सवेतन छुट्टी, अतिरिक्त मज़दूरी या दोनों का प्रावधान है — ठीक नियम राज्य पर निर्भर है।
- दफ़्तरों में नीति-आधारित कॉम्प-ऑफ़ भी चलता है — वह कंपनी की सेवा-शर्तों से तय होता है, पर वैधानिक न्यूनतम से कम नहीं हो सकता।
ज़रूरी बात: कॉम्प-ऑफ़ देने का मतलब यह नहीं कि छुट्टी के दिन के काम का अतिरिक्त भुगतान अपने आप माफ़ हो गया — कई राज्यों में दोनों देने होते हैं। अपने राज्य का अधिनियम देखें।
व्यवहार में
कॉम्प-ऑफ़ का हिसाब काग़ज़ पर छूट जाना सबसे आम चूक है। किसने किस तारीख़ का कॉम्प-ऑफ़ कमाया और कब लिया — यह रजिस्टर में दर्ज रखें और लेने की समय-सीमा साफ़ रखें, ताकि छुट्टियाँ जमा होकर विवाद न बनें।
कारखाना अधिनियम 1948 (धारा 53) तथा राज्य के दुकान एवं स्थापना अधिनियम — छूटे अवकाश के बदले प्रतिपूरक छुट्टी/अतिरिक्त भुगतान के प्रावधान राज्य-दर-राज्य अलग।
Tommy में छुट्टी के दिन की शिफ़्टें और बदले की छुट्टियाँ एक ही रोस्टर में दिखती हैं, जिससे किसका कॉम्प-ऑफ़ बाक़ी है — यह कभी अंदाज़े पर नहीं रहता।