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छंटनी मुआवज़ा

छंटनी मुआवज़ा वह भुगतान है जो 'वर्कमैन' श्रेणी के कर्मचारी को आर्थिक या ढाँचागत कारणों से नौकरी से हटाने (रिट्रेंचमेंट) पर कानूनन देना होता है। यह अनुशासनात्मक बर्ख़ास्तगी से अलग है — छंटनी में ग़लती कर्मचारी की नहीं, परिस्थिति की होती है।

भारत में छंटनी के नियम

औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के तहत जिस वर्कमैन ने कम से कम 240 दिन की निरंतर सेवा पूरी की हो, उसे हटाने से पहले देना होता है:

  • एक महीने का लिखित नोटिस (कारण सहित) या उसके बदले नोटिस-वेतन;
  • हर पूरे सेवा-वर्ष के लिए पंद्रह दिन की औसत मज़दूरी के बराबर मुआवज़ा;
  • सरकार को सूचना — और बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों में पूर्व अनुमति भी ज़रूरी हो सकती है (सीमा राज्य-दर-राज्य अलग)।

आम तौर पर 'पहले आए, बाद में जाएँ' (last in, first out) का सिद्धांत लागू होता है और दोबारा भर्ती में हटाए गए कर्मचारी को प्राथमिकता मिलती है। ग्रेच्युटी और बची छुट्टियों का भुगतान इसके अतिरिक्त बनता है।

नियोक्ता के लिए व्यावहारिक बातें

सेवा-अवधि और हाज़िरी का साफ़ रिकॉर्ड ही तय करता है कि 240 दिन की शर्त पूरी हुई या नहीं — विवाद की स्थिति में यही दस्तावेज़ काम आते हैं। प्रक्रिया में जल्दबाज़ी महँगी पड़ती है; अपने राज्य के नियम देखकर ही क़दम उठाएँ।

औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 (धारा 25F आदि) — नोटिस, मुआवज़ा और सरकारी सूचना/अनुमति की शर्तें; औद्योगिक संबंध संहिता 2020 इन्हीं प्रावधानों को आगे ले जाती है (क्रियान्वयन चरणबद्ध)।

Tommy में हाज़िरी और शिफ़्ट का इतिहास अपने आप सहेजा जाता है, जिससे सेवा-दिनों की गिनती जैसे संवेदनशील मामलों में आपके पास भरोसेमंद रिकॉर्ड रहता है।

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