ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि)
ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) भारत की सबसे बड़ी सेवानिवृत्ति-बचत योजना है, जिसे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) चलाता है। हर महीने कर्मचारी के वेतन से एक हिस्सा कटता है और नियोक्ता भी अपनी ओर से अंशदान जोड़ता है — यह रक़म ब्याज सहित कर्मचारी के खाते में जमा होती रहती है।
ईपीएफ कैसे काम करता है
- योजना ईपीएफ अधिनियम 1952 के तहत निर्धारित संख्या से अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों पर लागू होती है; छोटे प्रतिष्ठान स्वेच्छा से भी जुड़ सकते हैं।
- अंशदान मूल वेतन और महंगाई भत्ते पर लगता है; दरें और वेतन-सीमा केंद्र सरकार अधिसूचित करती है।
- नियोक्ता के अंशदान का एक हिस्सा पेंशन योजना (EPS) में और एक छोटा हिस्सा जीवन-बीमा योजना (EDLI) में जाता है।
- हर कर्मचारी को एक UAN (यूनिवर्सल अकाउंट नंबर) मिलता है, जो नौकरी बदलने पर भी वही रहता है — खाता साथ चलता है।
- नियोक्ता को हर महीने तय तारीख़ तक ECR (इलेक्ट्रॉनिक चालान) भरकर अंशदान जमा करना होता है; देरी पर ब्याज और हर्जाना लगता है।
नियोक्ता के लिए व्यावहारिक बातें
नियुक्ति के समय ही UAN लिंक करना और मूल वेतन का ढाँचा सही रखना सबसे ज़रूरी क़दम हैं — बाद की गड़बड़ियाँ सुधारना कहीं महँगा पड़ता है। ताज़ा दरों और सीमाओं के लिए EPFO की अधिसूचनाएँ देखें।
कर्मचारी भविष्य निधि एवं प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम 1952 — प्रशासन EPFO (श्रम एवं रोजगार मंत्रालय); दरें व वेतन-सीमा केंद्र सरकार अधिसूचित करती है।
Tommy की पेरोल रिपोर्ट से हर कर्मचारी के महीने के घंटे और कमाई का आधार एक क्लिक में मिल जाता है — ईपीएफ की मासिक फ़ाइलिंग के आँकड़े जुटाना आसान।