न्यूनतम वेतन
न्यूनतम वेतन वह सबसे कम दर है जिससे नीचे किसी कर्मचारी को मज़दूरी देना कानूनन मना है। भारत में यह कोई एक राष्ट्रीय आँकड़ा नहीं है — दरें 'समुचित सरकार' (केंद्र या संबंधित राज्य सरकार) अधिसूचना से तय करती है, और ये राज्य, रोज़गार की श्रेणी, कौशल-स्तर और कई जगह ज़ोन (क्षेत्र) के अनुसार अलग-अलग होती हैं।
भारत में न्यूनतम वेतन कैसे तय होता है
परंपरागत रूप से दरें न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के तहत अनुसूचित रोज़गारों के लिए अधिसूचित होती रही हैं। वेतन संहिता 2019 इस ढाँचे को सरल बनाकर सभी कर्मचारियों तक विस्तार देती है और केंद्र सरकार को एक 'फ़्लोर वेज' (आधार दर) तय करने का अधिकार देती है; इसका क्रियान्वयन चरणबद्ध है।
- दरें आमतौर पर अकुशल, अर्ध-कुशल और कुशल श्रेणियों में बँटी होती हैं।
- कई राज्यों में महंगाई के अनुसार परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (VDA) समय-समय पर जुड़ता है।
- ताज़ा दरों के लिए अपने राज्य श्रम विभाग की अधिसूचना देखें — दरें नियमित रूप से संशोधित होती हैं।
शिफ़्ट टीमों के लिए व्यावहारिक बातें
रोस्टर और पेरोल बनाते समय हर भूमिका पर लागू सही श्रेणी की दर पकड़ना ज़रूरी है — एक ही रेस्तरां में कुक और हेल्पर की दरें अलग हो सकती हैं। न्यूनतम वेतन ओवरटाइम की गणना का आधार भी है, इसलिए ग़लत दर का असर आगे तक जाता है। वेतन रजिस्टर और सैलरी स्लिप में दरें दर्ज रखना निरीक्षण के समय काम आता है।
न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 / वेतन संहिता 2019 — दरें 'समुचित सरकार' (केंद्र या राज्य) अधिसूचना से तय और समय-समय पर संशोधित करती है; ताज़ा दरों के लिए राज्य श्रम विभाग देखें।
Tommy में आप हर भूमिका के लिए वेतन-दर दर्ज कर सकते हैं, जिससे रोस्टर बनाते समय हर शिफ़्ट की अनुमानित लागत साफ़ दिखती है और पेरोल में दरें छूटती नहीं।
संबंधित शब्द
इसे आँकड़ों में देखें: मुफ़्त शिफ्ट लागत कैलकुलेटर बताता है कि ओवरटाइम जोड़ने पर एक शिफ्ट की असली लागत क्या है।