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सार्वजनिक अवकाश

सार्वजनिक अवकाश वे दिन हैं जब कानून के अनुसार कर्मचारियों को सवेतन छुट्टी मिलती है। भारत में इनकी कोई एक राष्ट्रीय सूची नहीं है — गणतंत्र दिवस (26 जनवरी), स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) और गांधी जयंती (2 अक्टूबर) लगभग हर जगह अनिवार्य राष्ट्रीय अवकाश माने जाते हैं, जबकि बाक़ी त्योहार-अवकाश राज्य तय करता है।

भारत में छुट्टियाँ कैसे तय होती हैं

अधिकांश राज्यों में 'राष्ट्रीय एवं त्योहार अवकाश अधिनियम' या दुकान एवं स्थापना अधिनियम के तहत हर प्रतिष्ठान को साल में निश्चित संख्या में सवेतन छुट्टियाँ देनी होती हैं — कुछ तय राष्ट्रीय दिन और कुछ त्योहार, जो राज्य की अधिसूचित सूची या कर्मचारी-नियोक्ता सहमति से चुने जाते हैं।

  • छुट्टियों की संख्या और सूची राज्य-दर-राज्य अलग है — महाराष्ट्र, तमिलनाडु और दिल्ली की सूचियाँ एक-सी नहीं हैं।
  • छुट्टी के दिन काम कराने पर ज़्यादातर राज्यों में दोगुनी मज़दूरी या बदले में सवेतन प्रतिपूरक अवकाश देना होता है।
  • रेस्तरां-रिटेल जैसे प्रतिष्ठान त्योहार के दिन खुले रह सकते हैं, पर कर्मचारी का हक़ बना रहता है।

रोस्टर पर असर

त्योहार वही दिन हैं जब ग्राहक सबसे ज़्यादा होते हैं और स्टाफ़ सबसे कम। छुट्टियों का कैलेंडर साल की शुरुआत में ही रोस्टर में डाल दें और त्योहार-शिफ़्टों के लिए स्वेच्छा से नाम पहले माँग लें — आख़िरी समय की खींचतान बच जाती है।

राज्य के राष्ट्रीय एवं त्योहार अवकाश अधिनियम / दुकान एवं स्थापना अधिनियम — छुट्टियों की संख्या, सूची और छुट्टी के दिन काम के बदले भुगतान या प्रतिपूरक अवकाश के नियम राज्य तय करता है।

Tommy के रोस्टर में छुट्टियाँ पहले से दर्ज कर सकते हैं, जिससे त्योहार के दिन की स्टाफ़िंग और बदले की छुट्टियाँ दोनों की योजना समय रहते बन जाती है।

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