कारखाना अधिनियम 1948
कारखाना अधिनियम 1948 भारत में विनिर्माण इकाइयों — कारखानों — में काम करने वालों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, कल्याण और काम के घंटों का मुख्य केंद्रीय कानून है। यह उन परिसरों पर लागू होता है जहाँ निर्धारित संख्या से अधिक कर्मचारी विनिर्माण प्रक्रिया में लगे हों; प्रशासन राज्य के कारखाना निरीक्षणालय के पास रहता है।
मुख्य प्रावधान
- काम के घंटे: सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे, दिन में अधिकतम 9 घंटे; स्प्रेड-ओवर की सीमा अलग से।
- ओवरटाइम: सीमा से अधिक काम पर सामान्य दर की दोगुनी मज़दूरी (धारा 59)।
- विश्राम: लगातार पाँच घंटे काम के बाद कम से कम आधे घंटे का अंतराल; सप्ताह में एक दिन की छुट्टी।
- सवेतन वार्षिक छुट्टी: पिछले साल 240 दिन काम पूरा करने पर — वयस्कों के लिए हर 20 दिन के काम पर एक दिन की दर से।
- सुरक्षा-कल्याण: मशीनों की बाड़, पीने का पानी, कैंटीन, क्रेच जैसी सुविधाएँ; रात्रि पाली व महिलाओं के घंटों पर विशेष नियम।
ध्यान दें: व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता (OSH Code) 2020 इस अधिनियम की जगह लेने के लिए बनी है, पर उसका क्रियान्वयन चरणबद्ध है — तब तक यही अधिनियम लागू है।
किस पर लागू नहीं होता
दुकानें, रेस्तरां और दफ़्तर इस अधिनियम के दायरे में नहीं आते — उन पर राज्य का दुकान एवं स्थापना अधिनियम लागू होता है। अगर आपकी इकाई में विनिर्माण और खुदरा दोनों हैं, तो दोनों कानूनों की जाँच करें।
कारखाना अधिनियम 1948 — प्रशासन राज्य कारखाना निरीक्षणालय/श्रम विभाग; राज्य संशोधन लागू; OSH संहिता 2020 क्रियान्वयन के बाद इसकी जगह लेगी।
Tommy शिफ़्टों के घंटे अपने आप जोड़कर दिखाता है, जिससे 48 घंटे की साप्ताहिक सीमा और ओवरटाइम की निगरानी रोस्टर बनाते समय ही हो जाती है।