ओवरटाइम
ओवरटाइम का मतलब है कानून में तय दैनिक या साप्ताहिक सीमा से अधिक काम कराना। भारत में इसकी सबसे जानी-पहचानी कसौटी कारखाना अधिनियम 1948 की है — दिन में नौ घंटे या सप्ताह में अड़तालीस घंटे से अधिक काम पर कर्मचारी ओवरटाइम का हक़दार हो जाता है।
भारत में ओवरटाइम के नियम
कारखाना अधिनियम के तहत ओवरटाइम की मज़दूरी सामान्य दर की दोगुनी होती है। दुकानों, रेस्तरां और दफ़्तरों पर राज्य का दुकान एवं स्थापना अधिनियम लागू होता है — वहाँ भी ज़्यादातर राज्यों में दोगुनी दर का ही नियम है, पर घंटे की सीमाएँ और तिमाही ओवरटाइम की अधिकतम मात्रा राज्य-दर-राज्य अलग हैं।
- ओवरटाइम की गणना का आधार 'सामान्य दर' है, जिसमें मूल वेतन के साथ कुछ भत्ते भी गिने जाते हैं।
- ओवरटाइम घंटे रजिस्टर में दर्ज करना नियोक्ता की कानूनी ज़िम्मेदारी है।
- एक तिमाही में ओवरटाइम के कुल घंटों की ऊपरी सीमा भी होती है — अपने राज्य के नियम देखें।
मैनेजर के लिए मायने
शिफ़्ट प्लानिंग में ओवरटाइम अक्सर अनजाने में बनता है — कोई देर रुक गया, किसी ने लगातार छह दिन काम कर लिया। हफ़्ते के बीच में ही घंटों पर नज़र रखने से दोगुनी दर का अनपेक्षित ख़र्च और नियम-उल्लंघन, दोनों से बचा जा सकता है।
कारखाना अधिनियम 1948 (धारा 59) — सीमा से अधिक काम पर सामान्य दर की दोगुनी मज़दूरी; दुकानों-प्रतिष्ठानों के लिए संबंधित राज्य का दुकान एवं स्थापना अधिनियम लागू होता है।
Tommy हर कर्मचारी के साप्ताहिक घंटे रोस्टर में ही जोड़कर दिखाता है, जिससे ओवरटाइम बनने से पहले ही आपको दिख जाता है कि कौन सीमा के क़रीब पहुँच रहा है।
संबंधित शब्द
भुगतान निकाल रहे हैं? मुफ़्त ओवरटाइम कैलकुलेटर सेकंडों में सही दरें लागू कर देता है।